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पेयजल समस्या से जूझ रहे जैसलमेर वासियो को समस्या से निजात कब मिलेगी


जलदाय विभाग ने समय रहते कंटेलीजेंसि प्लान क्यों नही बनाया

जैसलमेर  अप्रेल से जून तक मरुस्थलीय इलाके में पेयजल की समस्या जग जाहिर है।।इसी समस्या को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार के निर्देशानुसार पश्चिमी राजस्थान के सरहदी जिलों में जलदाय विभाग फरवरी तक कंटेलीजेंसि प्लान बनाकर अनुमोदन और बजट आवंटन के लिए राज्य सरकार को भेजने की परंपरा दशको से चली आ रही है।इस बार जैसलमेर जिले में जो हालात पेयजल समस्या के बने ऐसे पहले कभी नही बने।इस बार ग्रामीण इलाकों के साथ साथ शहरी क्षेत्र में पेयजल के लिए हाहाकार मचा है।यह समस्या कोई नई नही है।मगर सूत्रों की माने तो यह समस्या इस बार जलदाय विभाग और नगर परिषद के अधिकारियों की लापरवाही के कारण पैदा हुई।।जलदाय विभाग द्वारा या तो प्लान बना के नही भेजा गया या फिर प्लान का क्रियान्वयन नही कर पा रहे।।रोजमर्रा की समस्या की तरह पेयजल समस्या को हल्के में ले लिया।।अब व्यवस्थाऐं करना भारी हो गया।।जिले के अधिकांश गांव आपदाग्रस्त घोषित है।इसके बावजूद ग्रामीण और शहरी इलाकों में पेयजल टेंकरो से सप्लाय शुरू नही हुई।आज ग्रामीण एक एक घड़े के लिए फिर कोसो दूर जाने को विवस है।।समय रहते आपदा प्रबंध सहायता शाखा द्वारा पेयजल परिवहन के लिए निबिदाये निकालनी चाहिए थी।जलदाय बिभाग के काकंटिलिजेंसी प्लान का बजट कहाँ खर्च किया जा रहा हैं।या प्लान नही बनाया तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। जिला कलेक्टर को फिलहाल पेयजल समस्या के समाधान के लिए प्राथमिकता देकर हाईडेंट पॉइंट चिन्हित कर पेयजल टेंकरो से ग्रामीण इलाकों में परिवहन शुरू करना चाहिए ताकि जनता को राहत मिल सके। शहरी क्षेत्र में भी मात्र दो हाईडेंट पॉइंट होने से टेंकर ठेकेदारो को बहाना मिल जाता है।।शहरी क्षेत्र में संचालित टेंकरो पर प्रसासनिक मोनिटरिंग होनी चाहिए।कच्ची बस्तियों को रेंडमली पानी मिले ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।।शहर में एक आध टेंकर बस्ती में लेजाकर पेयजल आपूर्ति कर खानापूर्ति करने की बजाय राज्य सरकार की मंशा अनुरूप प्लान बनाकर टेंकरो से पेयजल आपूर्ति करे।।टेंकरो के साथ जिला प्रशासन पटवारी और पार्षद को भौतिक सत्यापन के लिए मुकर्रर कर ठेकेदारो पे अंकुश लगाना चाहिए ताकि जनता को राहत मिल सके।

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